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Mar 21, 2014

Brave Megh women - साहसी मेघ महिलाएँ


यह बात अब चिंता का विषय बन गई है कि बहुत से मेघ नशे के तस्करों (जो मेघ समुदाय के शत्रु हैं और इसे नष्ट करना चाहते हैं) के हाथ की कठपुतली बन गए हैं और अपनी नशे की आदत नहीं छोड़ रहे. अपना और अपने परिवार का धन शराब जैसी गैर-ज़रूरी चीज़ पर नष्ट कर रहे हैं. वे नहीं समझ पा रहे कि पैसा पहले शराब में जाता है फिर दवाइयों पर. इस नशे की आदत के कारण आज तक किसी को ढँग की मौत तक नसीब नहीं हुई, जीवन की तो बात ही जाने दीजिए.

पठानकोट के पास सैली कुलियाँ गाँव है जो पंजाब और हिमाचल की सीमा पर है. सुनने में आया है कि यहाँ के लगभग शतप्रतिशत मर्दों को नशे की आदत है. बच्चे सुबह खेतों में जाते हैं और नशा करके आ जाते हैं. इस स्थिति में यहाँ की महिलाएँ दारुण दुख उठा रही हैं. यहाँ विधवाओं की संख्या काफी अधिक है. घर-गृहस्थी चलाना कठिन हो जाता है, बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती और बड़े हो कर वे सस्ते मज़दूर ही बनते हैं. विकास का रास्ता उनके लिए बंद हो जाता है.

इन परिस्थितियों से तंग आकर यहाँ की मेघ महिलाओं ने एक साहस भरा कदम उठाया. इस क्षेत्र में सक्रिय शराब तस्करों को पहले उन्होंने चेतावनी दी और चेतावनी अनसुनी हो जाने पर तस्करों को माकूल सबक सिखाया जिसे मीडिया ने भली प्रकार कवर किया है. रानी झांसी वूमन वेल्फेयर सोसाइटी, पठानकोट की अध्यक्षा सुश्री आशा भगत ने अपनी संस्था की ओर से इन साहसी महिलाओं का सम्मान किया.

कुछ नाम थे जिन्हें मेघों के हीरो कहा जा सकता था. अब मेघ समुदाय की हीरोइनों की कमी नहीं खलेगी. मेरे इस ब्लॉग पर लिखे नामों में सुदेश कुमारी, आशा देवी, वीना रानी, स्नेहा, ज्योति, शशि कुमारी, रानी, पूनम और निक्की के नाम जुड़ गए हैं. मेघ समुदाय इनके साहस की प्रशंसा करता है और इन्हें समर्थन भी देता है. इन महिलाओं ने अपने और अपने परिवार के भविष्य के बारे में फैसला कर लिया है. आने वाले समय में ये अपने परिवार के नशेड़ियों को भी तुरुस्त कर लेंगी, ऐसा विश्वास है क्योंकि ऐसा होने का समय आ गया है. इनके साहस और ज़ज़्बे को सलाम!!

इस महत्वपूर्ण घटना की विस्तृत कवरेज आप इन तस्वीरें पर क्लिक करके देख सकते हैं.