May 26, 2017

शशि भाटिया

पंजाब के मेघ भगत श्री मिल्खी राम भगत, पीसीएस को बहुत आदर से याद करते हैं. उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेम भरा था और वे हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहते थे. उनके सभी बच्चे पढ़-लिख कर अच्छे पदों पर गए या समाज-सेवा के कार्य में लगे. 17 मई, 2017 को उनकी बेटी श्रीमती शशि भाटिया केनेडा से आई हुई थीं और ऑल इंडिया मेघ सभा के अनुरोध करने पर उन्होंने चंडीगढ़ में उपस्थित सदस्यों के साथ अपने अनुभव साझा किए. उनके उद्बोधन के ज़रिए उनके जीवन के कई अनजाने पक्ष सामने आए जिन्हें उपस्थितों ने बड़े शौक से सुना और सवाल भी किए. यह बहुत ही सुखद अनुभव रहा. इसके अलावा उन्होंने मुझे एक अलग से इंटरव्यू देना भी स्वीकार किया जिसे वीडियो के तौर पर MEGHnet पाठकों के लिए संभाल कर रख लिया है जिसे आप नीचे यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं.

केनेडियन आर्म्ड फ़ोर्सिस ने शशि भाटिया को एक प्रभावी व्यक्ति के तौर पर भर्ती किया है. “A new commemorative medal was created to mark the 2012 celebration of the 60th anniversary of Her Majesty Queen Elizabeth ll's accession to the Throne as Queen of Canada. Among seven of Durham Region recipients Shashi Bhatia daughter of late Mr. M.R. Bhagat was honored to receive Queen's Elizabeth ll Diamond Jubilee Medal during the Durham Regional Police Service ceremony on September 14, 2012 in Ajax, Ontario Canada.” इस अवसर पर मैडल के साथ उन्हें एक प्रशस्तिपत्र भी दिया गया. मेघ समुदाय उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करता है.





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Apr 26, 2016

Santram BA - संतराम बीए

श्री संतराम बी.ए.
70 के दशक में मेरा होशियारपुर आना जाना लगा रहता था मेरे पिता श्री मुंशी राम भगत वहां मानवता मंदिर में 14 साल रहे थे.  वहां वे साधु आश्रम के भी संपर्क में आए. उन्होंने साधु आश्रम, होशियारपुर से जुड़े एक सज्जन संतराम बी.. का उल्लेख किया था और साधु आश्रम में ही उन्हें एक पुस्तक मिली थी जिसमें मेघों के इतिहास की कुछ जानकारी थी जिसका उल्लेख उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मेघ-माला’ में किया है. इसमें लिखा था कि मेघों का एक पूर्वज वाराणसी से आया था और जम्मू में आकर बसा था. उसमें छपी कहानी पर उन्होंने काफी प्रश्न चिन्ह लगाए थे. इसके अतिरिक्त मेरे सबसे बड़े जीजा जी श्री सत्यव्रत शास्त्री (चंडीगढ़), जो संस्कृत में एम.. थे, ने भी दो-एक बार संतराम बी.. का उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा की थी और बताया था कि वे संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे. संस्कृत में मेरी कोई रुचि नहीं थी सो अधिक सवाल नहीं किए. पिता जी से सवाल पूछने की आदत बहुत कम थी.

डॉ. अंबेडकर की लिखी ‘Annihilation of Caste' (जाति उन्मूलन)’ पढ़ी थी. उस वर्शन में कहीं संतराम बीए का उल्लेख आया हो सो याद नहीं. ‘जात-पात तोड़क मंडल’ द्वारा लाहौर में आयोजित एक कार्यक्रम  के बारे में भी पढ़ा था. वहाँ संतराम बीए का नाम था. बस इतना ही याद है.

आंखों में तकलीफ के कारण इन दिनों जी-मेल बहुत कम देखा था आज सुबह उसे खोला तो ताराराम जी के भेजे हुए दो मेल प्राप्त हुए थे. एक मेल के साथ एक पुस्तक से फोटो भी प्राप्त हुआ जिसे पढ़ कर हैरानगी से अधिक खुशी हुई. यह संदर्भ Dalit Movement in India and its leaders (1857-1956) पृष्ठ 323 पर मिला है. इस पुस्तक के लेखक श्री आर.के. क्षीरसागर हैं. उसका स्क्रीन शॉट नीचे दिया है :-


ढूँढने पर अन्य एक साइट पर कुछ उल्लेख इस प्रकार मिला.

6. Shri Sant Ram B.A. ( His birthday falls on 14th Feb,2016  )                      
     Shri Sant Ram B.A. a Dalit (Megh) by caste was born on 14th Feburary 1887 at Puranni Bassi Hoshiarpur (Punjab). He had studied up to B.A. and thereafter devoted himself for Dalit upliftment social work. He was also a devoted Arya Samaji sect of Soami Dayanand Saraswati. To abolish caste system he worked to establish his own organization “Jat-Pat- Todak Mandal”. One of the plank of his organization was to promote inter-caste marriages and to get abolished caste system from within the Depressed classes. Since Arya Samajis did not cooperate with Jat-Pat Todakl Mandal ideals, so Sh.Sant Ram made it an independent organization to continue his efforts for  achieving  his set goals.
Shri Sant Ram invited Dr.Ambedkar to preside over 1936 annual convention of the Jat-Pat Todak Mandal to be held at Lahore and also deliver his presidential address. Dr.Ambedkar wrote the Presidential address, but the Mandal  committee wanted some changes in it, to which Dr. Ambedkar did not agree. The convention was cancelled and the presidential address was published by Baba sahib as “Annihilation of Caste” in 1936 itself and this book is considered as one of the best books written by the author. It has gone into so many reprints since then. Sant Ram himself translated into Hindi and published in the Kranti an Urdu monthly magazine. Sant Ram authored many books as well. He breathed his last on 5th June 1988.”


एक और लिंक मिला जिसमें संतराम बीए को ‘लाला’ कहा गया है. एक पुस्तक का भी उल्लेख मिला उसमें संभवतः संतराम जी का भाषण छपा था. उसका स्क्रीनशॉट नीचे दे रहा हूँ :-
FireShot Screen Capture #008 - 'List of Booklets I Dalit Resource Centre' - dalitresourcecentre_com_archive_list-of-booklets-.png
लाला’ शब्द भ्रामक हो सकता है. संभव है उन्हें आर्यसमाज से जुड़े होने के कारण किसी ने भूलवश ‘लाला’ कहा हो. मेरा ध्यान उनके ‘मेघ’ जाति के होने पर टिका है….और इसके साथ ही कुछ सवालों पर मेरा मन अटक गया है. दूसरी बात सामने आई कि प्रजापति समाज संतराम बीए को अपना मान कर उनका जन्मदिन मना चुका है. ताराराम जी ने बताया है कि संतराम जी के पिता कुम्हार का कार्य करते थे लेकिन वे मेघ थे जैसा कि ऊपर के स्क्रीन शॉट से स्पष्ट है. किन्हीं परिवारों के व्यवसाय बदल जाने से उनकी जाति बदल जाती है इसका संकेत स्वयं संतराम जी ने अपनी आत्मकथा में दिया है जिसके एक पृष्ठ की फोटो नीचे दी गई है.
उनका जीवन काल 16 फरवरी 1887 से 5 जून 1988 तक (सौ वर्ष से कुछ अधिक) रहा. वे 1945 में कांग्रेस में शामिल हुए और 1946 से 1962 तक पंजाब विधान परिषद के सदस्य रहे.  सन 1936 में जात-पात तोड़क मंडल के वार्षिक अधिवेशन में उन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अध्यक्षीय भाषण पढ़ने के लिए आमंत्रित किया था.  जाहिर है कि वे डॉक्टर अंबेडकर के संपर्क में थे.  उधर एडवोकेट हंसराज भगत भी डॉ अंबेडकर के संपर्क में थे और पंजाब की अछूत जातियों की अनुसूची बनाने का कार्य कर चुके थे.  इससे यह प्रश्न पैदा होता है कि क्या श्री संतराम और एडवोकेट हंसराज भगत का कोई आपसी संपर्क था? यह भी उल्लेखनीय है कि वे दोनों पंजाब विधान परिषद के सदस्य रहे. हंसराज भगत कुछ पहले और संतराम जी कुछ बाद में. क्या संतराम बीए की कोई कैमरे से खिंची बढ़िया-सी फोटो साधु आश्रम, होशियारपुर में उपलब्ध है? 

आखिर में दिल की एक बात कहता हूँ. मेघों के बारे में बहुत-सी नकारात्मक बातें कही जाती हैं, जैसे कि इनमें एकता नहीं होती, ये किसी की नहीं सुनते, ये केंकड़ों की तरह एक-दूसरे की टाँग खींचते हैं वगैरह. मैं इसे महत्व नहीं देता. मुझे इस बात की तकलीफ होती है कि पढ़ने-लिखने के बाद भी मेघों ने अपने बारे में नहीं लिखा. संतराम बीए ने खूब लिखा और आज हमारे पास उस समय के हालात का विवरण उपलब्ध है. उनका लेखन हिंदी साहित्य के इतिहास में अपना स्थान रखता है. उनकी आत्मकथा को भारत सरकार ने आर्काइव किया हुआ है. यदि एडवोकेट हंसराज जी ने भी लिखा होता तो उनके अनुभव हमारा मार्गदर्शन करते. जो खालीपन रह गया है उसे भरने का काम मेघों को ही करना होगा. इसलिए आप धाराप्रवाह बोलिए और लगातार लिखिए.

“जीओ ताराराम जी”.

03-07-2016 
ब्लॉग 26-04-2016 को प्रकाशित किया गया था. इस दौरान प्रो. राजकुमार भगत व्यक्तिगत रूप से पुरानी बस्सी, होशियारपुर गए और श्री संतराम बी.. के घर पहुँचे जहाँ वे रहा करते थे. वे उनके एक भतीजे से और उस गाँव के कुछ अन्य लोगों से भी मिले. मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि वे अपना अनुभव लिखें ताकि उसे यहाँ शेयर किया जा सके. फिलहाल उनकी भेजी हुई फोटो यहाँ दे रहा हूँ.
 
 

ये लिंक भी देखें-
bharatdiscovery.org
हिंदूराष्ट्र ब्लॉग


Aug 13, 2015

Kumar A. Bharati - कुमार अ. भारती

Kumar A. Bharati
1947 में पाकिस्तान से भारत आए मेघ भगतों को अलवर में ज़मीनें दिलवाने वाले इने-गिने लोगों में एडवोकेट दौलत राम जी का नाम बहुत महत्वपूर्ण है. मुझे उनके बारे में बहुत कुछ जानने की इच्छा थी. उसी सिलसिले में मैंने इंद्रजीत मेघ जी से अनिल कुमार भारती जी का फोन नंबर लेकर उन्हें फोन किया था. भारती जी ने बताया कि वे उन्हीं दौलतराम जी के सुपुत्र हैं. यह एक अद्भुत सरप्राइज़ था. भारती जी का फील्ड मुख्यतः रंगमंच है और इसी विषय के तहत वे 16 पुस्तकें लिख चुके हैं. जम्मू दूरदर्शन में वे कंट्रैक्चुअल आधार पर निर्देशक का कार्य भी करते हैं. इनका अपना शील्ड्स आदि बनाने का व्यवसाय है. जिस चीज़ ने मुझे अधिक आकर्षित किया वह यह थी कि वे जे. एंड के. में आरक्षण के हीरो रहे शहीद अमरनाथ भगत पर एक डाक्यूमेंट्री तैयार कर चुके हैं और मेघ भगतों के देरियों पर भी डाक्यूमैंट्री (दस्तावेज़ी फिल्म) बनाने का इरादा रखते हैं. साहित्य के क्षेत्र में कुछ अन्य मेघ भगतों ने कुछ कार्य किया है लेकिन नाटक जैसी विधा में अपनी पहचान डोगरी नाटकों द्वारा बनाने वाले वे पहले व्यक्ति हैं जो मेरी नज़र में आए हैं. उनका परिचय इस प्रकार है :-

नाम - अनिल कुमार

उपनाम - कुमार अ. भारती

जन्म - 08 अगस्त, 1956 (जालंधर, पंजाब में)

शिक्षा - बी.. ऑनर्स, डिप्लोमा एन.सी.वी.टी. और इलैक्ट्रॉनिक्स

पुरस्कार - जम्मू-कश्मीर कला, साहित्य और भाषा अकेडेमी, जम्मू. कुछ अन्य साहित्यिक संस्थाओं द्वारा नाट्य लेखन और अभिनय के क्षेत्र में पुरस्कृत.

संप्रति - दैनिक अख़बार कश्मीर टाईम्स में उप संपादक, 'खोज--जम्मू' समाचार-पत्र में संयुक्त संपादन, 'स्वर शिल्प प्रकाशन', जम्मू में निदेशक के रूप में कार्यरत.

प्रकाशित रचनाएँ - नाटक् उस मोड़ै पर, इक्क टुकड़ा ज़मीन दी तपाश, एक दिशा और, युग प्रवर्तक संत कबीर एवं जातिवाद, पुष्पांजलि, चल्ल मेरे हरणा टिच्चकटूँ, ग़लत व्याकरण, सूरज क़त्ल नहीं होते, कामदेव डॉटकाम, आओ छू लें गगन (शहीद अमरनाथ की जीवनी), डुग्गर दी अनमुल्ली लोक विरासत (भाग-1)

अप्रकाशित नाटक - पागलख़ाना, पासपोर्ट, हारा हुआ युद्ध, धारां रोई पेइयां, इंसानियत हाज़िर हो, ब्रह्मांड की सैर, कहानी औरत दी.
 
रूपांतरित नाटक - विसर्जन, राजरक्त, इक्क सुआल इह् बी, ख़ूनी पंजा, एक्स-रिफ्लैक्शन, अग्नि-बरखा, दी गवर्नमैंट इंस्पैक्टर, दी लास्ट कॉलोनी.

उनके ये टाइटल मुझे मिले हैं :-






कुमार अ. भारती
His new book named AAO CHOO LEIN GAGAN based on the life and ideology of Shaheed Amar Nath Bhagat released on 18-10-2015 in a function organised by B.J.P. at Jammu club. Book was released by Deputy Chief Minister of J&K Dr. Nirmal Singh. Present on the occasion were Priya Sethi State Minister for Education & culture, Dr. K.L. Bhagat M.L.A. Khour, Rajesh Gupta M.L.A. Jammu East & Youdh Veer Sethi senior B.J.P Leader.

Jul 11, 2015

Sh. Narpat Singh (Master) - श्री नरपत सिंह (मास्टर)

मेघ भगतों में क्या कोई स्वतंत्रता सेनानी भी हुआ है इसे लेकर कइयों के मन में सवाल उठते होंगे. मेरे मन में भी यह सवाल था सो मैंने बहुतों से पूछा लेकिन कभी किसी ने 'हाँ' में जवाब नहीं दिया. यही सवाल मैंने दीनानगर से आई बिटिया सुश्री अनीता भगत से किया तो उन्होंने हाँ कह कर मुझे चौंका दिया. फिर उन्होंने अपने साथ हिमाचल से आई एक और बिटिया ज्योति के परिवार का उल्लेख किया जो मेघ भगत हैं और जिनके दादा जी स्वतंत्रता सेनानी थे. उनके बारे में जितनी जानकारी एकदम ज्ञात हो सकी वह उन्होंने वाट्सएप्प के ज़रिए भिजवाई. फोटो भी उपलब्ध कराए जो आप सब की जानकारी के लिए दिए जा रहे हैं. एक ऐसा स्वतंत्रता सेनानी जिसके शरीर पर गोलियों के छह निशान थे.

नाम - श्री नरपत सिंह सुपुत्र श्री चिरजी लाल, गाँव बफड़ीं
तहसील और ज़िला हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)
जीवन काल - 1914-1992
शिक्षा - मिडल
जिस जेल में रहे - लाहौर, मुलतान
राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा ताम्र पत्र प्रदान किया गया
पत्नी - श्रीमती मनसा देवी
संतानें - पाँच बेटे और चार बेटियाँ
वे देश भक्ति के गीत गाने वाले गायक भी थे
उऩके गाँव की ग्राम पंचायत ने बफड़ीं में उनके गौरव सम्मान के लिए स्मृति द्वार बनवाया है.

(श्री नरपत सिंह जी के जीवन संबंधी अन्य ब्यौरों की प्रतीक्षा रहेगी.)
मास्टर नरपत सिंह



स्मृति द्वार